Yuva Bhaskar https://yuvabhaskar.com news Mon, 01 Jun 2026 19:27:30 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 मॉनसून अपने तय समय से 2-3 दिन लेट, मौसम विभाग ने बताई ये बात https://yuvabhaskar.com/2026/06/02/monsoon-delayed-by-23-days-here-is-the-reason/ Mon, 01 Jun 2026 19:27:30 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=74 mousam

मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल पहुंचेगा. अल-नीनो के असर के कारण इस साल कुल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. इससे कृषि क्षेत्र को दिक्कत हो सकती है.

देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब बहुत करीब आ गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी ताजा भविष्यवाणी में कहा है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मॉनसून केरल में दस्तक दे सकता है. आम तौर पर भारत में मॉनसून के आगमन की आधिकारिक तारीख 1 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार इसमें कुछ दिनों की देरी देखी जा रही है.

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप द्वीप समूह, केरल के कुछ हिस्सों तथा तमिलनाडु की ओर आगे बढ़ने के लिए रास्ता साफ हो गया है.

केरल में मॉनसून की एंट्री में देरी और अनुमानों में बदलाव

इस साल मॉनसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग के अनुमानों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. इससे पहले, आईएमडी ने भविष्यवाणी की थी कि मॉनसून अपनी सामान्य तारीख से पहले यानी 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा. मौसम में आए बदलावों के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई और इसमें देरी दर्ज की गई.

इसके बाद 29 मई को विभाग ने बयान जारी कर कहा था कि मॉनसून के आने में कुछ और दिनों का समय लग सकता है और यह अगले हफ्ते की शुरुआत में दस्तक देगा. अब मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि न केवल केरल और अरब सागर, बल्कि दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ दक्षिण बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों में भी मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां बेहद मजबूत हो चुकी हैं.

इस साल सामान्य से कम रहेगी बारिश

भले ही मॉनसून के आगमन की उल्टी गिनती शुरू हो गई हो, लेकिन बारिश के आंकड़ों को लेकर मौसम विभाग की नई रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है. आईएमडी ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में साफ चेतावनी दी है कि इस साल देश में सीजन की कुल बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है.

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) यानी दीर्घावधि औसत की केवल 90 फीसदी बारिश होने की उम्मीद है. मौसम विज्ञान की परिभाषा के अनुसार, एलपीए (LPA) का मतलब किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अंतराल (जैसे एक महीने या पूरे सीजन) के दौरान रिकॉर्ड की गई बारिश से होता है, जिसे 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है.

भारत के संदर्भ में, 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी बारिश का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित है. नियमतः, यदि किसी मॉनसून सीजन में एलपीए के 90 प्रतिशत से कम बारिश होती है, तो आईएमडी उसे कमजोर या कमी वाला (Deficient) मॉनसून घोषित करता है.

कमजोर मॉनसून के पीछे अल-नीनो का सबसे बड़ा हाथ

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने के पीछे प्रशांत महासागर में पैदा हो रही भौगोलिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं. आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि इस बार कम बारिश होने का सबसे बड़ा कारण अल-नीनो (El Nino) की स्थिति का उभरना है. जब भी प्रशांत महासागर में अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और बारिश में भारी कमी दर्ज की जाती है.

मौसम प्रणाली की स्थिति:

वर्तमान में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में ‘न्यूट्रल अल-नीनो-साउदर्न ऑसीलेशन’ (Neutral ENSO) की स्थिति समाप्त हो रही है. यह तेजी से अल-नीनो स्थितियों की ओर बढ़ रही है. मौसम विभाग का आकलन है कि अल-नीनो का प्रभाव शुरुआत में यानी जून के महीने में काफी कमजोर रहेगा, लेकिन जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा, अगस्त और सितंबर के आते-आते यह मध्यम से बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है. यही वजह है कि मॉनसून के शुरुआत में सूखे जैसी स्थिति का खतरा बढ़ गया है.

कृषि और भारतीय अर्थव्यवस्था पर मॉनसूनी अनिश्चितता का संकट
भारत में कृषि क्षेत्र पूरी तरह से मॉनसूनी बारिश पर निर्भर करता है, इसलिए मॉनसून में होने वाली किसी भी तरह की देरी या कमी का सीधा असर देश के करोड़ों किसानों और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है. जून के महीने में अल-नीनो के कमजोर रहने से शुरुआती बुवाई में तो मदद मिल सकती है, लेकिन सितंबर तक इसके मजबूत होने की आशंका ने खरीफ फसलों (जैसे धान, दलहन और तिलहन) के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

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पूर्व राज्यसभा सांसद स्व. कैलाश नारायण सारंग की जयंती की पूर्व संध्या पर वृद्धजनों का सम्मान कार्यक्रम https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/birth-anniversary-of-the-late-rajya-sabha-mp-kailash-narayan-sarang/ Mon, 01 Jun 2026 16:13:42 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=61

भोपाल | 01 जून 2026: भाजपा के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व सांसद स्व. श्री कैलाश नारायण सारंग की जयंती 2 जून की पूर्व संध्या पर नरेला विधानसभा के वार्ड 37, 75, 76, 77, 78 एवं 79 में मातृ-पितृ भक्ति दिवस एवं वृद्धजनों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री सारंग ने कार्यक्रम में सम्मिलत होकर वृद्धजनों के पांव पखारे और उनकी आरती उतारकर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर सभी वृद्धजन भाव विभोर ऩजर आये। सभी ने मंत्री श्री सारंग के द्वारा किये गये इस सम्मान को सहर्ष स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद दिया। मंत्री श्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि पूज्य पिताजी स्व. श्री कैलाश सारंग ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र एवं जनमानस की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका स्वप्न था कि प्रत्येक वृद्ध का सम्मान हो। इसी उद्देश्य के साथ हर वर्ष उनकी जयंती को संपूर्ण राष्ट्र में मातृ-पितृ भक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। मंत्री श्री सारंग ने बताया कि 2 जून को स्व. कैलाश सारंग की जयंती पर अनुयायियों एवं समर्थकों द्वारा सम्पूर्ण भोपाल शहर सहित देशभर में विविध सेवा के कार्य किए जाएंगे।

मंत्री श्री सारंग ने पांव पखारकर वृद्धजनों का किया सम्मान

मंत्री श्री सारंग ने नरेला विधानसभा अतंर्गत वार्ड 37, 75, 76, 77, 78 एवं 79 में आयोजित वृद्धजनों का सम्मान किया। यहां उन्होंने सर्वप्रथम सभी वरिष्ठों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिवादन किया। इसके पश्चात श्री सारंग ने उनके पांव पखारकर आरती उतारी। कार्यक्रम के दौरान अपने जनप्रतिनिधि को पुत्र के समान अपने पांव पखारते देख अनेक वृद्धजनों की आंखें नम हो गई। कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री सारंग ने वृद्धजनों को शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में पधारे सभी वृद्धजनों के पेयजल, स्वल्पाहार एवं भोजन की भी व्यवस्था की गई थी।

2 जून को नरेला में आयोजित कार्यक्रम का विवरण
2 जून को नरेला विधानसभा के विभिन्न वार्डों में वृद्धजनों का सम्मान एवं अनेक सेवाकार्य किए जाएंगे। इनमें वार्ड 71 (स्वामी विवेकानंद चौराहा), वार्ड 39 एवं 40 (चाणक्यपुरी), वार्ड 59 (अन्ना नगर), वार्ड 58 (सर्जना पार्क), वार्ड 44 (हनुमान मंदिर, आचार्य नरेंद्र देव नगर), वार्ड 70 (पिंक टॉवर के सामने), वार्ड 69 एवं 41 (नर्मदा चौराहा) तथा वार्ड 36 (जैन मंदिर के पास, शंकराचार्य नगर) कार्यक्रम किया जाएगा।

भोपाल सहित देशभर में होंगे विविध सेवाकार्य
2 जून को स्व. कैलाश नारायण सारंग की जयंती के अवसर पर उनके अनुयायियों, प्रशंसकों एवं समर्थकों द्वारा सम्पूर्ण भोपाल शहर में शरबत वितरण एवं विभिन्न सेवा से जुड़े कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा भी देशभर में सेवा, सहयोग एवं जनहित से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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बदलती सर्दियां, सिकुड़ते दाने, भारत के गेहूं पर बढ़ता जलवायु संकट https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/climate-change-impact-visible-on-wheat-grains-reveals-new-climate-trends-report/ Mon, 01 Jun 2026 13:26:21 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=58

दिल्ली की मंडियों तक पहुंचने वाली गेहूं की हर बोरी सिर्फ अनाज नहीं होती। उसमें एक मौसम छिपा होता है। ठंडी रातें, धुंध वाली सुबहें, जनवरी की ठिठुरन, और फरवरी की हल्की धूप। गेहूं सिर्फ खेत में नहीं उगता, वह मौसम की लय पर उगता है। लेकिन अब यही लय टूट रही है।

Climate Trends की नई रिपोर्ट “Wheat Under Stress: Climate Change, Rising Heat, and Adaptation Pathways in India’s Major Wheat-Growing States” एक ऐसे बदलाव की कहानी बता रही है जो धीरे-धीरे भारत की खाद्य सुरक्षा के भीतर दाखिल हो चुका है। यह बदलाव अचानक आई किसी आपदा जैसा नहीं है। यह हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ती गर्मी, छोटी होती सर्दियां, और बदलती रातों की कहानी है।

भारत हर साल करीब 107 मिलियन टन गेहूं पैदा करता है। दुनिया के कुल गेहूं उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत है और देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अब जलवायु परिवर्तन सिर्फ भविष्य का खतरा नहीं रहा। इसका असर खेतों में साफ दिखने लगा है।

रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में सर्दियों का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। सबसे बड़ा संकट सिर्फ दिन की गर्मी नहीं है, बल्कि रातों का गर्म होना है।

Climate Trends की Research Lead और इस अध्ययन की लीड ऑथर डॉ. Palak कहती हैं कि भारत के गेहूं उत्पादन के लिए सबसे कम चर्चा किया गया लेकिन सबसे चिंताजनक खतरा रात के तापमान का लगातार बढ़ना है। उनके मुताबिक गेहूं उगाने वाले लगभग सभी बड़े राज्यों में न्यूनतम तापमान, यानी रात का तापमान, दिन के तापमान से तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में रात का तापमान दिन की तुलना में लगभग तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी न्यूनतम तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर गेहूं की बालियों पर पड़ रहा है।

रात में ज्यादा गर्मी होने पर पौधे ज्यादा “respiration” करते हैं। आसान भाषा में कहें तो पौधा अपनी ऊर्जा जल्दी खर्च कर देता है। जो कार्बोहाइड्रेट दाने भरने में इस्तेमाल होना चाहिए, वह पहले ही खत्म होने लगता है। नतीजा यह होता है कि दाने सिकुड़ जाते हैं, वजन कम हो जाता है और गुणवत्ता गिर जाती है।

डॉ. पलक बल्यान के मुताबिक फरवरी और मार्च में अचानक बढ़ती गर्मी “grain filling window” को छोटा कर रही है। यानी वह समय जब गेहूं का दाना भरता है। फसल समय से पहले पकने लगती है और दाने अधपके व हल्के रह जाते हैं।

रिपोर्ट में एक और बड़ा संकेत उत्तर भारत के गेहूं बेल्ट से आया है। पंजाब और हरियाणा, जिन्हें देश का गेहूं भंडार माना जाता है, वहां पिछले तीन दशकों में उत्पादन वृद्धि दर लगातार गिर रही है।

1986 से 1995 के बीच हरियाणा में गेहूं की दशकवार वृद्धि दर लगभग 30 प्रतिशत थी। लेकिन 2015 से 2025 के बीच यही दर घटकर माइनस 2.6 प्रतिशत तक पहुंच गई। पंजाब में भी लगभग ऐसा ही रुझान दिखा।

यानी खेती का क्षेत्र वही है, किसान वही हैं, लेकिन मौसम अब वैसा नहीं रहा जिस पर यह पूरी व्यवस्था खड़ी थी।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि फरवरी सबसे तेजी से गर्म हो रहा महीना बन गया है। 2010 से 2025 के बीच फरवरी में हर दशक लगभग 0.69 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मार्च और अप्रैल भी तेजी से गर्म हुए हैं।

इसका असर गेहूं के सबसे संवेदनशील चरणों पर पड़ रहा है। फूल आने और दाना बनने के समय अगर तापमान बढ़ जाए तो फसल जल्दी खत्म होने लगती है। कई जगह खराब अंकुरण, कम tillering यानी कम फुटाव, जल्दी पकना और कीटों का दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

लेकिन कहानी सिर्फ गर्मी की नहीं है। बारिश भी बदल रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ अब देर से आ रहे हैं और मार्च-अप्रैल में ज्यादा बारिश ला रहे हैं। यही वह समय होता है जब कई राज्यों में गेहूं पक चुका होता है या कटाई चल रही होती है। ऐसे में अचानक बारिश पूरी फसल खराब कर सकती है।

गुजरात के किसान राम सिंह बताते हैं कि पहले खेतों में गेहूं को सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता था, लेकिन अब कुछ महीनों में ही अनाज खराब होने लगता है।

राम सिंह कहते हैं कि अक्टूबर की गर्मी में बीज ठीक से अंकुरित नहीं होते। फिर फरवरी-मार्च की अचानक गर्मी दानों को जल्दी सुखा देती है। ऊपर से कटाई के समय बारिश हो जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

उनके मुताबिक अब कीटों का हमला भी बढ़ गया है। नमी बढ़ने से भंडारण मुश्किल हो गया है और खेती लगातार जोखिम भरा काम बनती जा रही है। गांव के कुछ परिवार खेती छोड़ने तक लगे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र कुमार ढाका कहते हैं कि पिछले कुछ दशकों में मौसम के पैटर्न में साफ बदलाव दिख रहा है। सर्दियां छोटी और गर्म हो रही हैं, जिससे गेहूं का प्राकृतिक growth cycle प्रभावित हो रहा है।

उनके मुताबिक कटाई के समय होने वाली बेमौसम बारिश और बढ़ती नमी फसल को नुकसान पहुंचा रही है। इससे दानों का रंग बदलता है, fungal infection बढ़ते हैं और गुणवत्ता गिरती है।

रिपोर्ट में पंजाब और हरियाणा के किसानों की चिंताएं भी दर्ज हैं। किसानों का कहना है कि नवंबर अब पहले जितना ठंडा नहीं रहता, जिससे गेहूं का germination प्रभावित होता है। वहीं फरवरी और मार्च की गर्मी grain filling stage को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है।

Kheti Virasat Mission के Executive Director उमेंद्र दत्त का कहना है कि यह सिर्फ जलवायु संकट नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य का भी संकट है। उनके मुताबिक दशकों की chemical-intensive farming ने मिट्टी की प्राकृतिक क्षमता कमजोर कर दी है।

वे कहते हैं कि अब खेती को “yield-centric” मॉडल से निकालकर “soil-centric” और climate-resilient farming की तरफ ले जाने की जरूरत है। Mulching, crop residue management, indigenous seeds और soil organic matter बढ़ाने जैसे उपाय गर्मी और नमी के दबाव से लड़ने में मदद कर सकते हैं।

Climate Trends की Founder and Director आरती खोसला कहती हैं कि अब छोटे-छोटे coping measures काफी नहीं होंगे। उनके मुताबिक climate-smart agriculture, early warning systems और parametric insurance जैसे उपायों को तेजी से बढ़ाना होगा ताकि किसानों और खाद्य सुरक्षा दोनों को बचाया जा सके।

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब India Meteorological Department यानी IMD ने 2026 के मानसून अनुमान को घटाकर long period average के 90 प्रतिशत तक कर दिया है। वहीं दुनिया की कई मौसम एजेंसियां 2015-16 के बाद सबसे मजबूत El Nino बनने की आशंका जता रही हैं।

भारत में गेहूं सिर्फ एक फसल नहीं है। यह करोड़ों लोगों की रोटी है। गांव की अर्थव्यवस्था है। और शायद यही वजह है कि खेतों में बदलता मौसम अब सिर्फ किसानों की समस्या नहीं रह गया। यह धीरे-धीरे हर रसोई तक पहुंचने वाली कहानी बनता जा रहा है।

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BHOPAL RAILWAY NEWS: निरस्त की गई रानी कमलापति-संतरागाछी हमसफ़र एक्सप्रेस बहाल https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/rani-kamalapati-santragachi-humsafar-express-restored/ Mon, 01 Jun 2026 11:39:38 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=55

भोपाल, 1 जून 2026: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल के अंतर्गत बिलासपुर जंक्शन-चाँपा जंक्शन रेलखण्ड पर होने वाले अधोसरंचनात्मक निर्माण कार्यों के संदर्भ में पूर्व में संयुक्त कमीशनिंग के तहत जो प्री-नॉन इंटरलॉकिंग, नॉन इंटरलॉकिंग एवं पोस्ट नॉन इंटरलॉकिंग कार्य लिया गया था, उसे अब निरस्त कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, इस अधिसूचना के तहत भोपाल मंडल से प्रारम्भ/टर्मिनेट होने वाली संतरागाछी-रानी कमलापति-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को जो पूर्व में एक-एक ट्रिप के लिए निरस्त किया गया था, उसे बहाल कर दिया गया है।

Good News for Bhopal Travellers: Rani Kamalapati–Santragachi Humsafar Express Reinstated

रानी कमलापति-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस पूर्व निर्धारित तिथियों और समय सारणी के अनुसार सुचारू रूप से चलेंगी:-

गाड़ी संख्या 22169 रानी कमलापति-संतरागाछी जंक्शन हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन अपने प्रारम्भिक स्टेशन रानी कमलापति जंक्शन से 10 जून 2026 को निरस्त नहीं रहेगी अर्थात अपनी निर्धारित समय सारणी के अनुसार यथावत चलेगी।
इसी प्रकार गाड़ी संख्या 22170 संतरागाछी जंक्शन-रानी कमलापति हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन अपने प्रारम्भिक स्टेशन संतरागाछी जंक्शन से 11 जून 2026 को निरस्त नहीं होगी अर्थात अपनी निर्धारित समय सारणी के अनुसार यथावत चलेगी।

यात्रियों से अनुरोध की ट्रेनों के सुचारू संचालन के बावजूद, किसी भी अन्य असुविधा से बचने के लिए रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवा NTES या रेल मदद (139) के माध्यम से गाड़ी की सटीक स्थिति की जांच अवश्य कर लें।

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शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/meeting-of-the-parliamentary-standing-committee-on-education-women-children-youth-and-sports/ Mon, 01 Jun 2026 06:09:17 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=46 दिल्ली: कांग्रेस MP दिग्विजय सिंह शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में शामिल होने के लिए पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी (PHA) पहुंचे।

बैठक का पहला एजेंडा शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ग्रांट्स की मांगों (2025-26) पर 364वीं रिपोर्ट में शामिल सिफारिश/अवलोकन पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर 381वीं रिपोर्ट पर विचार करना और उसे अपनाना है।

इसके बाद, कमिटी ‘पेन-एंड-पेपर टेस्टिंग’ बनाम CBT के इस्तेमाल और NEET और NTA से जुड़े विचारों पर भी चर्चा करेगी।

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स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास, सिटीजन फीडबैक में देश में प्रथम स्थान पर https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/swachhata-survekshan-2025-26/ Sun, 31 May 2026 20:19:13 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=30

भोपाल: 30 मई, 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ के संकल्प को धरातल पर अक्षरशः चरितार्थ करने तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में पुनः एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत संचालित देशव्यापी ‘सिटीजन फीडबैक’ (नागरिक प्रतिक्रिया) अभियान में, वर्ष 2011 की जनगणना के मानदंडों के आधार पर, मध्यप्रदेश समस्त राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में देश में प्रथम स्थान पर रहा है। प्रदेश के 35.69 लाख से अधिक जागरूक नागरिकों ने ऑनलाइन माध्यमों से अपनी सहभागिता दर्ज कराकर न केवल स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है, अपितु यह भी सिद्ध कर दिया है कि डिजिटल इंडिया के युग में मध्यप्रदेश के नागरिक तकनीकी रूप से आगे हैं।

राज्य स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों और अथक परिश्रमी ‘सफाई मित्रों’ का अभिनंदन किया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की अटूट जागरूकता और विभागीय अमले की कर्तव्यनिष्ठता के समन्वय से ही प्रदेश स्वच्छता के उच्च शिखर पर निरंतर गतिमान है। राज्य स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की टीम द्वारा इस वर्ष एक अनूठी ‘360 डिग्री रणनीति’ का क्रियान्वयन किया गया। इस समेकित कार्ययोजना के अंतर्गत सभी नगरीय निकायों के सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से 60 लाख से अधिक जनमानस तक पहुँच स्थापित की गई।

इसके अतिरिक्त पारंपरिक और आधुनिक संचार माध्यमों जैसे कचरा संग्रहण वाहनों, समाचार पत्रों, रेडियो, दूरदर्शन के ऑडियो-वीडियो संदेशों तथा घर-घर जाकर चलाए गए सघन जन-जागरूकता अभियानों से समाज के हर वर्ग को इस पुनीत कार्य से जोड़ा गया।


डिजिटल सहभागिता को सुगम और व्यापक बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तर से एक करोड़ से अधिक लक्षित एसएमएस (SMS) प्रेषित किए गए। इसके साथ ही, आधुनिक युग के प्रभावशाली संचारकों—सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स—का भी सहयोग लिया गया, जिससे युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह का संचार हुआ। इस व्यापक और भगीरथ प्रयास का परिणाम धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से प्रदेश की राजधानी भोपाल के नागरिकों में इस वर्ष अपूर्व उत्साह देखा गया है।

  • जहाँ गत वर्ष भोपाल में मात्र 5.13 हजार
  • जहाँ गत वर्ष भोपाल में मात्र 5.13 हजार
  • जहाँ गत वर्ष भोपाल में मात्र 5.13 हजार
  • जहाँ गत वर्ष भोपाल में मात्र 5.13 हजार

जहाँ गत वर्ष भोपाल में मात्र 5.13 हजार नागरिकों ने अपना फीडबैक दिया था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 3.86 लाख को पार कर गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन की टीमें पूरी सक्रियता से धरातल पर कार्य कर रही हैं जिससे इस गति को और अधिक तीव्र किया जा सके और प्रदेश स्वच्छता के पायदान पर शीर्ष पर बना रहे।

राज्य सरकार और नगरीय विकास विभाग ने प्रदेश के समस्त नागरिकों से आह्वान किया है कि वे अपने शहर को स्वच्छता के शीर्ष पायदान पर बनाए रखने के लिए अपनी सहभागिता निरंतर जारी रखें। नागरिक केन्द्रीय मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://cf.sbmurban.org/survey पर जाकर अथवा निर्धारित क्यूआर (QR) कोड को स्कैन कर अपना बहुमूल्य ऑनलाइन फीडबैक अवश्य दर्ज कराएं।
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क्रमांक/490/121
अवंतिका जायसवाल

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मध्यप्रदेश में डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट https://yuvabhaskar.com/2026/06/01/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95/ Sun, 31 May 2026 20:06:28 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=26

भोपाल, 31 मई 2026: मध्यप्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की पहल के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के डीआरपी लाइन में ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ का लोकार्पण तथा ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स का और 10 पुलिस वाहनों का लोकार्पण कर इन्हें इंदौर पुलिस के बेड़े में शामिल कराया। यह ड्रोन्स पुलिस की तीसरी आंख के रूप में हर वक्त कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर इंदौर शहर में तीन नए पुलिस थाने खोलने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कमी की पूर्ति भी क्रमबद्ध रूप से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हर साल पुलिस विभाग के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती कर रहे हैं। लगभग सभी पदों पर भर्ती जारी है। हम प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा पुलिस विभाग के साथ है। परन्तु नागरिकों को बेवजह परेशानी या अपने पदीय कर्तव्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लोगों के हित में है, तो एक चुनौती भी है, इसलिए इसका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन पुलिस का कान्सेप्ट इंदौर से ही आया है। अब यह एक मिसाल बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘विरासत से विकास’ के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस इंदौर को सेवा, सुशासन और जनकल्याण के जीवन मूल्यों से जोड़ा था, अपनी श्रम साधना से सींचा था, आज वही शहर नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान वास्तव में सुशासन की दिशा में ‘लोक कल्याणकारी राज्य’ के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार तकनीक से लोगों की तकदीर बदलने, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और लोकसेवा का नया अध्याय लिखने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ और ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ जैसे नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को नई ताकत प्रदान करेंगे। आज इंदौर में हुआ यह नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को बेहतर काम करने की नई ऊर्जा देगा तथा नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल स्मार्ट और सुरक्षित इंदौर की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और सुशासन के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। आज लोकार्पित ड्रोन्स कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस के लिए सहायक होंगे, वहीं ट्रेफिक साथी ऐप वाहन चालकों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इस ऐप के जरिए वाहन चालक पार्किंग की बेहतर लोकेशन जान सकेंगे।

पुलिस कमिश्नर इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस के बेड़े में 18 ड्रोन्स शामिल किए जा रहे हैं। अब इंदौर पुलिस भीड़ के समुचित‍ प्रबंधन में इन अत्याधुनिक ड्रोन्स के बेहतर उपयोग करने के लिये तैयार हो गई है। इन ड्रोन्स से 2 किलोमीटर का दायरा कवर होगा। उन्होंने कहा कि अब हम न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि अपराधों पर भी नजर रख सकेंगे। इसका प्रयोग इंदौर में रंगपंचमी पर निकली गैर और बसंत पंचमी पर भोजशाला में कानून व्यवस्था के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इंदौर पुलिस ने 4 हजार 370 लोगों को नि:शुल्क हेलमेट बांटे हैं।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सुश्री उषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया, विधायक श्री रमेश मेंदोला, विधायिका श्री मालिनी गौड़, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री मनोज पटेल, विधायक श्री राकेश शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
क्रमांक : 3139H संदीप//घनश्याम सिरसाम

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सुशासन की दिशा में वरदान साबित हो रहा विज्ञान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव https://yuvabhaskar.com/2026/05/31/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8/ https://yuvabhaskar.com/2026/05/31/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8/#respond Sun, 31 May 2026 19:21:54 +0000 https://yuvabhaskar.com/?p=8

भोपाल, 31 मई 2026: मध्यप्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की पहल के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के डीआरपी लाइन में ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ का लोकार्पण तथा ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स का और 10 पुलिस वाहनों का लोकार्पण कर इन्हें इंदौर पुलिस के बेड़े में शामिल कराया। यह ड्रोन्स पुलिस की तीसरी आंख के रूप में हर वक्त कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर इंदौर शहर में तीन नए पुलिस थाने खोलने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कमी की पूर्ति भी क्रमबद्ध रूप से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हर साल पुलिस विभाग के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती कर रहे हैं। लगभग सभी पदों पर भर्ती जारी है। हम प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा पुलिस विभाग के साथ है। परन्तु नागरिकों को बेवजह परेशानी या अपने पदीय कर्तव्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लोगों के हित में है, तो एक चुनौती भी है, इसलिए इसका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन पुलिस का कान्सेप्ट इंदौर से ही आया है। अब यह एक मिसाल बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘विरासत से विकास’ के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस इंदौर को सेवा, सुशासन और जनकल्याण के जीवन मूल्यों से जोड़ा था, अपनी श्रम साधना से सींचा था, आज वही शहर नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान वास्तव में सुशासन की दिशा में ‘लोक कल्याणकारी राज्य’ के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार तकनीक से लोगों की तकदीर बदलने, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और लोकसेवा का नया अध्याय लिखने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ और ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ जैसे नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को नई ताकत प्रदान करेंगे। आज इंदौर में हुआ यह नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को बेहतर काम करने की नई ऊर्जा देगा तथा नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल स्मार्ट और सुरक्षित इंदौर की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और सुशासन के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। आज लोकार्पित ड्रोन्स कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस के लिए सहायक होंगे, वहीं ट्रेफिक साथी ऐप वाहन चालकों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इस ऐप के जरिए वाहन चालक पार्किंग की बेहतर लोकेशन जान सकेंगे।

पुलिस कमिश्नर इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस के बेड़े में 18 ड्रोन्स शामिल किए जा रहे हैं। अब इंदौर पुलिस भीड़ के समुचित‍ प्रबंधन में इन अत्याधुनिक ड्रोन्स के बेहतर उपयोग करने के लिये तैयार हो गई है। इन ड्रोन्स से 2 किलोमीटर का दायरा कवर होगा। उन्होंने कहा कि अब हम न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि अपराधों पर भी नजर रख सकेंगे। इसका प्रयोग इंदौर में रंगपंचमी पर निकली गैर और बसंत पंचमी पर भोजशाला में कानून व्यवस्था के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इंदौर पुलिस ने 4 हजार 370 लोगों को नि:शुल्क हेलमेट बांटे हैं।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सुश्री उषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया, विधायक श्री रमेश मेंदोला, विधायिका श्री मालिनी गौड़, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री मनोज पटेल, विधायक श्री राकेश शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
क्रमांक : 3139H संदीप//घनश्याम सिरसाम

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